Rashi Ratan (राशि रत्‍न)

Rashi Ratan: Natural and Original with Lab Certification

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Rashi Ratan or Rashi Ratna

Rashi Ratna are very popular among India. People use to wear Rashi Ratan for easy & problem free life.
 

Story of Rashi Ratna

At the time of birth Astrologer calculate the planetary position and draft that on a paper in a mannered fix way. The structure comes out is called Janam Kundali or Birth Chart.
According to this structure he studied effect of planet on human and this process is called Birth Chart Analysis.
But in current time it is very difficult to find a good Astrologer then people wear rashi ratan according to there name. This rashi is called as ‘Name Rashi’.
 

Namkaran Sanskar and Rashi Ratna

Namkaran Sanskar is totally based on planetary position at the time of birth. The astrologer studied birth chart and calculate the position of Moon. They find Rashi and Nakshatra of Moon and give name and rashi according to that.

Rashi & Rashi Name

At the time of birth Moon occupied Rashi is called Janam Rashi (Vedic Zodiac Sign) of a person and name latter given to him according to Moon’s Nakshatra (Star) and this makes Janam Name Rashi.
This Rashi gives character to human. This Rashi controls thought, expression, presentation of person.

Effect of Rashi Ratna

  • This is luck stone for wearer.
  • Rashi Ratna attracts wealth and good health.
  • It improves nature character and health issues of wearer.

राशि रत्‍न

भारत में राशि रत्‍न का बडा महत्‍व है। यहां राशि रत्‍न को जीवन को सरल और सुविधापूर्ण करने के लिए राशि रत्‍नों को धारण करने की परंपरा है। अब विदेशों में भी इस चीज का प्रचार जोरो से हुआ है और राशि रत्‍न को लकी स्‍टोन की तरह विदेशों में भी धारण किया जाने लगा है।
 

राशि रत्‍न कैसे और क्‍यों

जन्‍म के समय आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों का अध्‍ययन करके उसे एक तय शुदा आकार में पेपर पर उतार कर वेदिक ज्‍योतिषाचार्य कुंडली का निर्माण करते हैं। यह कुंडली वास्‍तव में जन्‍म के समय आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों का विवरण होता है।
यहां चंद्रमा की स्थिति का विशेष महत्‍व होता है। और इसी प्रक्रिया से निकल के आती है व्‍यक्ति की राशि और उसे दिया जाता है उसका जन्‍म नाम।
 

नामकरण संस्‍कार और राशि का नाम

चंद्रमा की स्थिति जिस राशि में होती है उसे व्‍यक्ति की जन्‍म राशि कहा जाता है और यह देखा जाता है चंद्रमा जन्‍म के समय किस नक्षत्र में उपस्थित था। इसी के अनुसार उनको नाम का पहला अक्षर दिया जाता है। यह अक्षर वास्‍तव में नक्षत्र का प्रथम अक्षर होता है।
 

राशि और राशि नाम

चंद्रमा की जिस राशि में उपस्थिति होती है वह राशि की व्‍यक्ति की नाम राशि होती। इसी चंद्रमा की जिस नक्षत्र में उपस्थिति होती है उसके नाम के पहले अक्षर के आधार पर बालक को नाम अक्षर दिया जाता है। यही नामकरण संस्‍कार के नाम से हिन्‍दू धर्म में जाना जाता है।
 
 

राशि रत्‍न का प्रभाव

  • यह धारण करने वाले के भाग्‍योदय के लिए बहुत की प्रभावशाली होता है।
  • राशि रत्‍न धारण करने के बाद काम में आ रही अड़चनें दूर हो जाती हैं।
  • रुपए पैसे को लेकर आ रही समस्‍या दूर हो जाती है और जीवन में जिस भी चीज के लिए संघर्ष करते हैं उसकी प्राप्‍त‍ि होती है।
  • कार्य सिद्ध होते हैं और अड़चनें दूर होती है।
नमो नम:। क्‍या आप कोई जानकारी चाहते हैं